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| Wednesday 20 August, 2008 |
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First blog... starting with a ghazal
Starting my first blog with one of my ghazal that I wrote in my college days.
कहीं किसि पर हर तरफ से गुलों कि बौछार होति है, कहिं किसि कि ज़िन्दगी में हर तरफ से हार होति है,
अजब रिवाज़ है तेरि दुनीया का ऐ आसमा वाले, कोई हार कर जीतता है, किसीकि जीत कर हार होती है ।
हर एक इंसान लिये फ़िरता है कोइ न कोइ ज़ख्म, कोई मारता है तलवार से, कहिं निग़ाह दिल के पार होति है ।
हर किसि को रास नहीं आते मौसम बहार के, कुछ ग़ुल ऐसे भि हैं जो मुरजाते हैं जाब बहार होति है ।
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